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क्या हैं डिप्थीरिया के कारण, लक्षण और बचाव

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डिप्थीरिया एक प्रकार की संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से बच्चों को ज़्यादा होती है। अगर इस बीमारी का संक्रमण बड़ों में आ जाए तो यह बीमारी बड़ों में भी हो सकती है। इस बीमारी में मुख्य रूप से साँस लेने में तकलीफ महसूस होती है यह संक्रामक रोग उचित देखभाल ना करने पर प्राणघाती भी हो सकता है।

क्या है डिप्थीरिया ?

डिप्थीरिया नमल इस बीमारी को गलघोंटू के नाम से भी जाना जाता है। मुख्य रूप से यह बीमारी
कॉरीनेबैक्टेरियम डिफ्थीरिया बैक्टीरिया के इंफेक्शन से होता है। इसके बैक्‍टीरिया टांसिल व श्वास नली को संक्रमित करता है जिस से साँस लेने में परेशानी का अनुभव होता है। इस संक्रमण में श्वास नली में एक झिल्ली बन जाती है जिस से साँस लेने में तकलीफ होती है और कई बार इस वजह से व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है। यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों में ज़्यादा होती है जिसकी वजह से मुँह सूखने लगता है गले में झिल्ली पद जाती है जो साँस लेने में रुकावट पेद्दा करता है। आपको बता दें की इस बीमारी का अगर सही समय पर इलाज ना किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकती है। डिप्थीरिया संक्रमित बच्चे के अन्य बच्चों के संपर्क में आने से भी फैलता है।

क्या है डिप्थेरिया के लक्षण?

  • मुख्य रूप से इस बीमारी के लक्षण संक्रमण फैलने के दो से पांच दिनों में दिखाई देते हैं।
  • डिप्थीरिया होने पर व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है।
  • इस संक्रमण के दौरान गर्दन में सूजन हो सकती है, यह लिम्फ नोड्स भी हो सकता है।
  • इस संक्रमण में बच्‍चे को ठंड लगती है, लेकिन यह संक्रमण सामान्य कोल्‍ड से अलग होता है।
  • इस संक्रमण फैलने के बाद हमेशा बच्चे को बुखार रहता है जो कभी टूटता नहीं है।
  • खांसी आने लगती है, खांसते वक्‍त आवाज भी अजब हो जाती है।
  • इस संक्रमण के दौरान बच्चे की त्‍वचा का रंग नीला पड़ जाता है।
  • इस बीमारी में संक्रमित बच्‍चे के गले में खराश की शिकायत हो जाती है।
  • इस संक्रमण के दौरान शरीर हमेशा बेचैन रहता है।

क्या है डिप्थीरिया के कारण ?

  • यह एक संक्रमण की बीमारी है जो इसके जीवाणु के संक्रमण से फैलती है।
  • इसका जीवाणु पीडि़त व्यक्ति के मुंह, नाक और गले में रहते हैं।
  • यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसने और छींकने से फैलता है।
  • बारिश के मौसम में इसके जीवाणु सबसे अधिक फैलते हैं।
  • यदि इसके इलाज में देरी हो जाये तो जीवाणु पूरे शरीर में फैल जाते हैं।

क्या हैं डिप्थीरिया के उपचार?

आपको बता दें की डिप्थीरिया के मरीजों को एंटी-टॉक्सिन्‍स दिए जाते है इस से इस संक्रमण को रोका जाता है शुरुआती समय में कम एंटी टॉक्सिन्स दिए जाते है लेकिन बाद में आवश्यकता पड़ने पर धीरे धीरे इन्हे बढ़ाया जाता है।आप अपने बच्चे को जन्म के बाद डिप्थीरिया के टीके लगवाएं इन्हे लगवाने से डिप्थीरिया नहीं होता है।  हम आशा करते है यह जानकारी आपके लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हुई होगी और आप इसे अपने मित्रों के साथ आवश्य शेयर करेंगे। अगर आपका इस पोस्ट से जुड़ा कोई सुझाव या टिपण्णी हो तो हमारे साथ आवश्य शेयर करें।

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